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कर्तव्यहीनता पर सख्त प्रहार: 311 दिन की गैरहाजिरी ने छीनी वर्दी, आरक्षक राहुल शर्मा सेवा से बर्खास्त*

आभास शर्मा
बलौदाबाजार

*बलौदाबाजार–भाटापारा | 10 फरवरी 2026*

जिला बलौदाबाजार–भाटापारा पुलिस में अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोपरि मानते हुए एक कड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता ने अनधिकृत रूप से लंबे समय तक कर्तव्य से अनुपस्थित रहने, घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोपों के तहत आरक्षक क्रमांक 215 राहुल शर्मा को सेवा से पृथक (बर्खास्त) करने का आदेश जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरक्षक राहुल शर्मा दिनांक 05 अप्रैल 2025 से बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार 311 दिवस तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। यह अनुपस्थिति न केवल विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन थी, बल्कि पुलिस जैसे अनुशासित बल की गरिमा और कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित आरक्षक के विरुद्ध विभागीय जांच आदेशित की गई। जांच के दौरान अपचारी आरक्षक को नियत तिथियों पर उपस्थित होने हेतु बार-बार नोटिस जारी किए गए तथा उसे अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर भी प्रदान किया गया, किंतु इसके बावजूद आरक्षक राहुल शर्मा ने जांच कार्यवाही में उपस्थित होना उचित नहीं समझा। यह रवैया उसकी लापरवाही और अनुशासनहीनता को और अधिक पुष्ट करता है।
विभागीय रिकॉर्ड के अवलोकन में यह भी सामने आया कि आरक्षक राहुल शर्मा अपने पूरे सेवाकाल के दौरान कुल 14 बार कर्तव्य से गैरहाजिर रह चुका है। बार-बार की गई यह अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि संबंधित आरक्षक द्वारा पूर्व में भी अनुशासनात्मक चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
समस्त तथ्यों, साक्ष्यों और विभागीय जांच में स्थापित आरोपों की प्रमाणिकता के परिप्रेक्ष्य में समग्र अध्ययन के पश्चात पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता ने मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1996 के नियम 10(8) तथा मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ पुलिस मैनुअल एवं रेगुलेशन की कंडिका 221(अ) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आदेश जारी होने की तिथि से रक्षित केंद्र बलौदाबाजार में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 215 राहुल शर्मा को सेवा से पृथक करने का अंतिम आदेश पारित किया।
*यह कार्रवाई पुलिस विभाग में यह स्पष्ट संदेश देती है*
कि अनुशासनहीनता, कर्तव्य में लापरवाही और जिम्मेदारियों से पलायन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी, ताकि पुलिस बल की साख, कार्यकुशलता और जनता के प्रति उत्तरदायित्व अक्षुण्ण बना रहे।

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